all the exams to be held in Rajasthan. It provides knowledge about questions and answers of exams like REET, Patwari, SI, VDO, Teacher exam to be held in Rajasthan. ' name='description'/> राजस्थान की कला संस्कृति - Rajasthan General Knowledge Rajasthan Ki Sbhi Bharti Parikshao Ke Liye Reet,SI,Patwari,VDO, All Exam

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राजस्थान की कला संस्कृति

राजस्थान के अजेय दुर्ग और कलात्मक हवेलियाँ: इतिहास और स्थापत्य का अद्भुत संगम

राजस्थान की भूमि सिर्फ राजा-महाराजाओं की कहानियों के लिए ही नहीं, बल्कि अपने बेजोड़ स्थापत्य के लिए भी दुनिया भर में मशहूर है। यहाँ के ऊँचे पहाड़ों पर बने किले और गलियों में छिपी नक्काशीदार हवेलियाँ आज भी बीते कल के वैभव की गवाही देती हैं।

1. दुर्ग स्थापत्य कला (Fort Architecture) - एक परिचय

राजस्थान में स्थापत्य कला का जनक महाराणा कुंभा को माना जाता है। कविराजा श्यामलदास के अनुसार, मेवाड़ के 84 दुर्गों में से 32 दुर्गों का निर्माण अकेले महाराणा कुंभा ने करवाया था

शुक्रनीति के अनुसार दुर्गों को 9 श्रेणियों में बांटा गया है:

·         एरण दुर्ग: जिसके चारों ओर झाड़ियाँ और कंकड़-पत्थर हों।

·         पारिख दुर्ग: जिसके चारों ओर गहरी खाई हो (जैसे- लोहागढ़, भरतपुर)।

·         पारिध दुर्ग: जिसके चारों ओर मजबूत दीवार (प्राचीर) हो।

·         वन दुर्ग: जो चारों ओर से घने जंगलों से घिरा हो।

·         जल (औदक) दुर्ग: जो चारों ओर से जलराशि से घिरा हो (जैसे- गागरोन, भैंसरोड़गढ़)।

·         धान्वन दुर्ग: जिसके चारों ओर मरुभूमि (रेगिस्तान) हो (जैसे- सोनारगढ़, जूनागढ़, भटनेर)।

·         गिरि दुर्ग: जो ऊँची पहाड़ी पर बना हो (सर्वश्रेष्ठ उदाहरण- तारागढ़, अजमेर)।

·         सैन्य दुर्ग: जहाँ सैनिकों का निवास हो।

·         सहाय दुर्ग: जहाँ राजा के सगे-संबंधी और वीर योद्धा रहते हों।

यूनेस्को विश्व धरोहर (UNESCO World Heritage): वर्ष 2013 में राजस्थान के 6 प्रमुख दुर्गों को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया था। इसे याद रखने की शॉर्ट ट्रिक है "चीकु गाजर आम" (चित्तौड़गढ़, कुंभलगढ़, गागरोन, जैसलमेर, रणथंभौर, आमेर)।।

2. राजस्थान के प्रमुख महादुर्ग  

क. चित्तौड़गढ़ दुर्ग दुर्गों का सिरमौर :- यह किला गंभीरी और बेड़च नदियों के संगम पर मेसा के पठार पर स्थित है। इसे 'राजस्थान का गौरव' और 'दुर्गों का सिरमौर' कहा जाता है। यह क्षेत्रफल की दृष्टि से राज्य का सबसे बड़ा दुर्ग और सबसे बड़ा लिविंग फोर्ट (आवासीय किला) है।

·         इतिहास: इसका निर्माण चित्रांगद मौर्य ने करवाया था। इस दुर्ग में इतिहास के तीन प्रसिद्ध साके हुए।

·         प्रवेश द्वार: इसके कुल 7 प्रवेश द्वार हैं। पांडन पोल के पास रावत बाघसिंह की छतरी, भैरव पोल व हनुमान पोल के बीच जयमल मेड़तिया व वीर कल्ला राठौड़ की छतरी और रामपोल के पास फत्ता सिसोदिया की छतरी बनी है।

·         दर्शनीय स्थल: 13वीं सदी में जीजाक द्वारा निर्मित जैन कीर्ति स्तंभ, कुंभास्वामी मंदिर, त्रिभुवन नारायण मंदिर (भोज मंदिर), सतबीस देवरी जैन मंदिर, तुलजा भवानी मंदिर, रानी पद्मिनी महल, भामाशाह हवेली, नवलखा बुर्ज और फतेह प्रकाश संग्रहालय।

ख. कुंभलगढ़ दुर्ग (राजसमंद) मेवाड़ की संकटकालीन राजधानी

इसका निर्माण महाराणा कुंभा ने अपने शिल्पी मंडन के सहयोग से (1448-1458 के मध्य) अपनी पत्नी कुंभलदेवी की याद में करवाया था।

·         कटारगढ़: इसका ऊपरी भाग 'कटारगढ़' (बादल महल) कहलाता है, जिसे 'मेवाड़ की आँख' भी कहते हैं। यहीं महाराणा प्रताप का जन्म हुआ था।

·         इतिहासकारों के कथन: अबुल फजल ने इसकी ऊँचाई को देखकर लिखा था"यह इतनी ऊँचाई पर है कि ऊपर देखने पर माथे की पगड़ी गिर जाती है।" कर्नल टॉड ने इसकी तुलना 'एस्ट्रकन' से की है।

·         प्रमुख घटनाएँ: महाराणा उदयसिंह और महाराणा प्रताप दोनों का राज्याभिषेक इसी दुर्ग में हुआ था। पन्नाधाय अपने पुत्र चंदन का बलिदान देकर उदयसिंह को बनवीर से बचाकर यहीं लाई थीं।

·         दर्शनीय स्थल: नीलकण्ठ महादेव मंदिर (यूनानी शैली), झालीरानी का मालिया, झालीबाव बावड़ी और उड़ना पृथ्वीराज की 12 खंभों की छतरी

3. गागरोन, सोनारगढ़, रणथंभौर एवं आमेर दुर्ग

क. गागरोन दुर्ग (झालावाड़)

ख. सोनारगढ़ दुर्ग (जैसलमेर) 

गोरहरा पहाड़ी पर स्थित इस धान्वन दुर्ग की नींव 1155 ई. में जैसल भाटी ने रखी थी। पीले पत्थरों से बिना चूने के बने होने के कारण इसे 'स्वर्णगिरि' या 'रेगिस्तान का जहाज' भी कहते हैं। इस किले में ढाई (2.5) साके हुए थे (तीसरा अर्ध-साका था, जिसमें केसरिया हुआ पर जौहर नहीं)।

ग. रणथंभौर दुर्ग (सवाई माधोपुर)

चौहान शासकों द्वारा निर्मित इस दुर्ग के बारे में अबुल फजल ने कहा था"अन्य सब दुर्ग नंगे हैं, जबकि यह बख्तरबंद है।" यहाँ का प्रसिद्ध त्रिनेत्र गणेश मंदिर, हम्मीर देव द्वारा निर्मित 32 खंभों की 'न्याय की छतरी' और सुपारी महल (हिंदू, मुस्लिम व ईसाई आस्था का संगम) मुख्य आकर्षण हैं।


घ. आमेर दुर्ग (जयपुर)

राजा मानसिंह द्वारा निर्मित यह दुर्ग हिंदू और मुस्लिम स्थापत्य शैली का अनूठा मिश्रण है। यहाँ का शीश महल राज्य का सर्वश्रेष्ठ शीश महल माना जाता है, जिसकी दीवारों पर काँच की अद्भुत जड़ाई की गई है।

4. इतिहास के अन्य महत्वपूर्ण किले

किले का नाम

स्थान

मुख्य विशेषता / उपनाम

मेहरानगढ़

जोधपुर

चिड़ियाटूंक पहाड़ी पर स्थित। किपलिंग ने कहा"इसका निर्माण देवताओं परियों ने किया।" यहाँ जयबाण की तरह कई प्रसिद्ध तोपें (गजनी खां, किलकिला) हैं।

भटनेर दुर्ग

हनुमानगढ़

राज्य का सबसे प्राचीन दुर्ग। 1398 में तैमूर के आक्रमण के समय यहाँ हिंदू और मुस्लिम दोनों महिलाओं ने एक साथ जौहर किया था।

बयाना दुर्ग

भरतपुर

यहाँ समुद्रगुप्त के समय का 'भीमलाट' स्तंभ है, जो राज्य का सबसे प्राचीन विजय स्तंभ है।

सिवाना दुर्ग

बालोतरा/बाड़मेर

'जालौर दुर्ग की कुंजी' और मारवाड़ के शासकों की संकटकालीन राजधानी।

मैग्जीन दुर्ग

अजमेर

'अकबर का किला' हल्दीघाटी युद्ध की पूरी योजना यहीं बनी थी और सर थॉमस रो ने जहाँगीर से यहीं मुलाकात की थी।

तारागढ़

अजमेर

बिठली पहाड़ी पर स्थित। विलियम बैंटिक ने इसे 'राजपूताना का जिब्राल्टर' कहा था।

जयगढ़

जयपुर

यहाँ एशिया की सबसे बड़ी तोप 'जयबाण तोप' रखी है। यह अपने विशाल पानी के टांकों के लिए प्रसिद्ध है।

लोहागढ़

भरतपुर

महाराजा सूरजमल द्वारा निर्मित अजेय मिट्टी का किला, जिसे लॉर्ड लेक 5 बार में भी नहीं जीत पाया।

जूनागढ़

बीकानेर

'जमीन का जेवर' रायसिंह द्वारा निर्मित इस किले के सूरजपोल पर जयमल और फत्ता की गजारूढ़ मूर्तियाँ हैं।

चुरू का किला

चुरू

1814 . में बारूद खत्म होने पर दुश्मनों पर चांदी के गोले बरसाने वाला विश्व का एकमात्र किला।

5. हवेली स्थापत्य कला (Haveli Architecture)

राजस्थान की हवेलियाँ यहाँ के सेठों के वैभव और कलाकारों की बारीकी को दर्शाती हैं। वल्लभ संप्रदाय में मंदिरों को भी 'हवेली' कहा जाता है।

·         बीकानेर: इसे 'हजार हवेलियों का शहर' कहा जाता है। यहाँ की बच्छावतों की हवेली और रामपुरिया हवेली बहुत प्रसिद्ध हैं।

·         शेखावाटी: यह क्षेत्र अपने भित्ति चित्रण (Frescos) के लिए दुनिया भर में मशहूर है, इसलिए शेखावाटी को 'ओपन आर्ट गैलरी' भी कहा जाता है।

·         चूरू की हवेलियाँ: यहाँ की सुराणाओं की हवेली सबसे खास है, जिसमें 1100 दरवाजे और खिड़कियाँ हैं! इसके अलावा दानचंद चौपड़ा की हवेली और मालजी का कमरा भी दर्शनीय हैं।

·         झुंझुनूं की हवेलियाँ: महनसर की 'सोने-चाँदी की हवेली' अपनी भव्यता के लिए जानी जाती है। इसके अलावा नवलगढ़ की पोद्दार हवेली और मंडावा की लड़ियों की हवेली कला के बेजोड़ नमूने हैं।

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